Profile            Work as MP          MPLADS             Manifesto            In News              Blog          City Beautiful          Picture Gallery           Wallpapers

Wednesday, February 20, 2008

सूचना के अधिकार प्राप्ति के आवेदनों के फीस बढ़ना है गलत

जागरण याहू (Jagran.Yahoo.com)
Feb 20, चंडीगढ़- चंडीगढ़ के पूर्व सांसद सत्यपाल जैन ने केंद्र की कांग्रेस (ई) सरकार द्वारा नियंत्रित चंडीगढ़ प्रशासन लोगों द्वारा सूचना प्राप्ति के लिए दिए जाने वाले आवेदनों की फीस बढ़ाने की कार्रवाई की कड़े शब्दों में आलोचना की है।
     उन्होंने कहा कि यह निर्णय संसद द्वारा सर्वसम्मति से पास किए गए उस कानून का भद्दा मजाक है, जिसके माध्यम से देश की जनता को यह अधिकार दिया गया था कि कोई भी नागरिक सरकार से वह जानकारी ले सकता है, जो उसे जनहित में ठीक लगती है।
     उन्होंने कहा कि वास्तव में जनता द्वारा मांगी जा रही जा रही जानकारी में कोई फीस होनी ही नही चाहिए या फिर यदि हो तो इतनी कम कि कोई गरीब से गरीब व्यक्ति भी आसानी से दे सके। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस संबंध में विभिन्न स्तरों पर फीस बढ़ाकर एक आम गरीब नागरिक से यह अधिकार छीनने का तथा इसे कुछ चंद अमीर आदमी का ही हक बनाए रखने का प्रयास किया है। जैन ने कहा कि जनता द्वारा प्रश्न पूछने एवं जानकारी मांगने पर अधिकारिक तौर पर अधिक पैसे मांगना, उतना ही गंभीर मामला है जितना कि कुछ सांसदों ने संसद में प्रश्न पूछने के लिए पैसे मांगकर किया था। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग कि बढ़ाए गए फीस के रेट तुरंत वापिस लिया जाए ताकि आम आदमी जनता के इस अधिकार की , जो सरकारों हर वक्त चौकन्ना रखता है, इसकी रक्षा की जा सके।

Friday, February 08, 2008

एडमिनिस्ट्रेटर के पास न दफ्तर, न स्टाफ

भास्कर न्यूज
Deepak Dhiman
February 08, 2008, चंडीगढ़. क्या आप यकीन करेंगे कि चंडीगढ़ के प्रशासक का कोई दफ्तर नहीं है और न ही उनके लिए कोई स्टाफ ही उपलब्ध है। शायद, नहीं। और वे लोग तो कतई नहीं जो 1999 से लेकर 2004 तक यूटी सेक्रेटेरिएट में प्रशासक के दफ्तर में जाकर उनसे वहीं मिलते रहे हैं।
     राइट टू इन्फॉर्मेशन एक्ट के तहत मांगी गई एक जानकारी देने से बचने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन अब दलील दे रहा है कि प्रशासक के लिए न तो अलग से कोई दफ्तर है और न ही इस दफ्तर के लिए कोई स्टाफ। लिवलीन सिंह ने आरटीआई के तहत प्रशासक के दफ्तर से बुड़ैल जेल में बंद कैदियों की सजा माफी से संबंधित जानकारी मांगी थी।
     जैकब और वर्मा नियमित तौर पर आते थे: ले.जन. (रिटा.) जेएफआर जैकब और चीफ जस्टिस (रिटायर्ड) ओपी वर्मा जब पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक थे, दोनों नियमित तौर पर यूटी सेक्रेटेरिएट में प्रशासक के दफ्तर में आते रहे।
रोड्रिग्स नहीं आते इस दफ्तर में:
अपने कार्यकाल के शुरूआती दिनों को छोड़कर चंडीगढ़ के मौजूदा प्रशासक जनरल (रिटायर्ड) एस. एफ. रोड्रिग्स इस दफ्तर में नहीं आए। कई बार तो इन्हें इस दफ्तर में आए महीनों बीत जाते हैं। उनका ज्यादातर कामकाज राजभवन ने ही चलता है, जहां आम लोगों का पहुंच पाना आसान नहीं। अब इस दफ्तर पर सील जड़ दी गई है।
"जब तक केन्द्र में भाजपा की सरकार थी तब तक चंडीगढ़ के प्रशासक नियमित तौर पर यूटी सेक्रेटेरिएट में अपने दफ्तर में बैठते रहे हैं और लोगों से मिलते रहे हैं। मैं खुद कई बार विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों के साथ उन्हें यूटी सेक्रेटेरिएट में प्रशासक के दफ्तर में मिला हूं। अब यह कहना कि चंडीगढ़ प्रशासक का दफ्तर ही नहीं है, यह दर्शाता है कि प्रशासन और केन्द्र सरकार चंडीगढ़ के प्रति कितनी गंभीर है।"
सत्यपाल जैन, पूर्व सांसद चंडीगढ़

एल्युमनी मिले तो याद आए बीते दिन

भास्कर न्यूज
Sunday, February 17, 2008
चंडीगढ़. कोई 60 सावन पार कर चुका है, तो कोई 70, जब कॉलेज के दिनों के यही यार शनिवार को दोबारा कॉलेज में मिले तो अपने बीते दिनों की यादें ताजा कीं। जीसी-11 के एल्युमनी मीट में एकत्रित हुए इन पूर्व स्टूडेंट्स को कॉलेज की एल्युमनी एसोसिएशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था। ......
ये भी रहे हैं कॉलेज के छात्र
>> भूपेंद्र हुड्डा-हरियाणा के सीएम
>> पवन बंसल- केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री
>> कपिल सिब्बल-केन्द्रीय साइंस एंड टेक्नोलॉजी मंत्री
>> राजीव प्रताप रूडी-बीजेपी प्रवक्ता
>> सत्यपाल जैन-पूर्व सांसद
>> प्रो. आर.सी सोबती-पंजाब यूनिवर्सिटी के वी.सी
>> प्रदीप मेहरा-चंडीगढ़ प्रशासक के एडवाइजर
....